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काबुली चने की खेती के लिए चुनी उन्नत किस्म, किसान सोलंकी खुमान सिंह ने शुरू किया बीज उत्पादन

घर से ही हो जाती बीज की बिक्री

बीज अच्छी गुणवत्ता का हो तो फसल भी अच्छी होती है और बीज उत्पादन के व्यवसाय से किसानों की अच्छी कमाई भी हो जाती है। गुजरात के सुरेंद्रनगर ज़िले के करमाड गांव के किसान यही कर हैं। काबुली चने की खेती में उन्नत किस्म का चयन कर कैसे आमदनी और कमाई में इज़ाफ़ा हुआ, जानिए इस लेख में।

कभी रोग व कीटों के कारण जो किसान काबुली चने की खेती से कतराते थे, वही अब जमकर इसके बीज उत्पादन से लाखों की कमाई कर रहे हैं। गुजरात के सुरेंद्रनगर ज़िले के करमाड गाँव के किसान सोलंकी खुमान सिंह वालजीभाई कभी सिर्फ़ घरेलू इस्तेमाल के लिए ही चने का उत्पादन करते थे। क्षेत्र के दूसरे किसानों की तरह ही वो भी पुराने स्थानीय किस्मों के बीज से खेती किया करते थे। ये पुरानी किस्में हेलिकोवरएर्मेगेरा लार्वा और विल्ट रोग से प्रभावित होती थी, जिससे उत्पादन बहुत कम होता था। उत्पादन कम था तो लिहाज़ा कमाई भी ज़्यादा नहीं होती थी। मगर कृषि विज्ञान केन्द्र के हस्तक्षेप के बाद इलाके की तस्वीर बदल गई। अब करमाड गाँव उच्च गुणवत्ता वाले काबुली चने के बीज के लिए लोकप्रिय हो चुका है।

चने की उन्नत किस्म जीजेजी-3 का उत्पादन

करमाड गाँव में खरीफ़ सीज़न में कपास, तिल और बाजरा की खेती होती है। रबी मौसम में गेहूं, जीरा और चना उगाया जाता है। पहले यहां के किसान खुले बीज (स्वदेशी) की बुवाई करते थे, जिससे उपज बहुत कम प्राप्त होती थी। सोलंकी खुमान सिंह वालजीभाई भी यही करते थे, जिससे उन्हें चने की फसल से कोई मुनाफ़ा नहीं होता था। इसलिए वह सिर्फ़ घरेलू इस्तेमाल के लिए ही इसका उत्पादन करते थें।

काबुली चने की खेती chickpea farming
तस्वीर साभार-indiamart

मगर 2015-16 में कृषि विज्ञान केन्द्र जेएयू, सुरेंद्रनगर ने NFSM क्लस्टर एफएलडी के तहत 50 किसानों को कवर करते हुए 20 हेक्टेयर क्षेत्र में उत्पादन के लिए चने की उन्नत किस्म जीजेजी-3 उपलब्ध कराई। सोलंकी खुमान सिंह वालजीभाई भी उनमें से एक थे। इस किस्म के काबुली चने का उत्पादन काफ़ी अच्छा रहा और आसपास के गाँव के अन्य किसानों के बीच भी इसकी मांग बढ़ने लगी। इसे देखते हुए खुमान सिंह भाई ने अच्छा मुनाफ़ा कमाने के मकसद से अगले साल बड़े क्षेत्र में तुरंत इस किस्म का उत्पादन शुरू किया। उन्नत किस्म के चुनाव से काबुली चने की खेती में उन्हें उम्मीद के मुताबिक मुनाफ़ा भी हुआ। कृषि विज्ञान केन्द्र ने कई किसानों को बीज उत्पादन का व्यवसाय करने की सलाह दी, क्योंकि इससे अच्छा मुनाफ़ा कमाया जा सकता है और खुमान सिंह ने इस सलाह पर अमल किया।

काबुली चने की खेती से बंपर बीज उत्पादन

खुमान सिंह ने 2016-17 में 2 हेक्टेयर क्षेत्र में बंपर बीज उत्पादन किया। उन्होंने कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों की सलाह से बीज का उचित भंडारण किया। बीजों को छांटकर वर्गीकृत किया और उसे एयरटाइट डबल लेयर्ड प्लास्टिक लैमिनेटेड बोरे में रखा। उसी दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र के साथ मिलकर उन्होंने कृषि से जुड़े कई कार्यक्रमों जैसे किसान मेला, प्रदर्शनी, किसान बैठक, क्षेत्र दिवस और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में चने की उन्नत बीज का प्रचार किया।  इसका फ़ायदा यह हुआ कि खुमान सिंह के घर से ही 60 क्विंटल बीज की बिक्री हुई यानी बिना किसी परिवहन खर्च के उनके 60 क्विंटल बीज बिक गए।

काबुली चने की खेती chickpea farming
तस्वीर साभार: jau

अधिक उत्पादन के लिए हुए प्रेरित

बीजों की लोकप्रियता देखखर खुमान सिंह ने रबी सीज़न 2016-17 के लिए 2 हेक्टेयर भूमि में इसकी बुवाई की और उन्हें 62 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इसमें से 60 क्विंटल बीज को बिक्री के लिए रखा और इसे 23 किसानों को उचित कीमत पर बेचा। इससे उन्हें अच्छी कमाई हुई। काबुली चने के बीज को 7500 प्रति क्विंटल की दर से बेचा। इस तरह से 2 हेक्टेयर क्षेत्र से उन्हें 4.61 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित हुई। बीज की बिक्री से उनका तो फ़ायदा है ही, साथ ही आसपास के किसानों को बाज़ार से कम कीमत में अच्छी गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे उनका भी फ़ायदा हो रहा है। कम समय में ही करमाड गाँव काबुली चने की उन्नत किस्म के बीज उत्पादन के लिए लोकप्रिय हो चुका है।

काबुली चने की खेती chickpea farming
तस्वीर साभार: jau

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