संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने दुनिया भर के किसानों और कीट विज्ञानियों के लिए चेतावनी जारी की है कि आने वाले समय में खाद्यान्न फ़सलों की उपज को फॉल आर्मीवर्म (fall armyworm) नामक कीट से भारी नुकसान पहुँच सकता है। इसका मूल स्थान अमेरिका में दक्षिणी फ्लोरिडा और टेक्सास का इलाका माना गया है। लेकिन इसका दुष्प्रभाव अब तक भारत समेत 70 देशों की कम से कम 80 किस्म की फ़सलों, सब्ज़ियों, फलों और फूलों तक फैल चुका है।
फॉल आर्मीवर्म का वैज्ञानिक नाम Spodoptera frugiperda है। साल 2016 में ये कीट नाइजीरिया पहुँचा और कुछ ही दिनों में अफ्रीका के 44 देशों में फैल गया। यह कीट इतना खतरनाक है कि जिस भी फ़सल में लगता है, उसे बिल्कुल नष्ट कर देता है। इसीलिए FAO के अनुसार, फॉल आर्मीवर्म से छुटकारा पाने के लिए वैश्विक स्तर पर भारी रक़म खर्च की जा चुकी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, सभी देशों को इस नियमित और गम्भीर कीट से बचने के लिए योजनाबद्ध तरीके से क़दम बढ़ाना होगा। क्योंकि अब ये अफ्रीका और यूरोप के अलावा एशियाई देशों की खेती के लिए भी भारी ख़तरा पैदा कर रहे हैं। कड़ाके की सर्दी के मौसम में फॉल आर्मीवर्म या तो जीवित नहीं रह पाते या फिर निष्क्रिय अवस्था में चले जाते हैं लेकिन गर्मियों के महीनों में तेज़ी से विकसित होते हैं और अपने मज़बूत पंखों की बदौलत लम्बी दूरियाँ तय कर लेते हैं।
अमेरिका के फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के कीट विशेषज्ञों के अनुसार, फॉल आर्मीवर्म को मुख्य आहार के रूप में मक्का और स्वीट कॉर्न अति-प्रिय है। लेकिन इससे जौ, बरमूडाग्रास, बकव्हीट (buckwheat), कपास, तिपतिया घास, अल्फला, जई, बाजरा, मूँगफली, धान, राईग्रास, चुकन्दर, सूडानग्रास, सोयाबीन, गन्ना, टिमोथी, तम्बाकू और गेहूँ जैसी फ़सलें भी अक्सर प्रभावित होती हैं। सेब, अंगूर, सन्तरा, पपीता, आड़ू, स्ट्रॉबेरी और अनेक फूलों की फ़सल भी कभी-कभार इन कीटों की चपेट में आ जाती है।
फॉल आर्मीवर्म के लिए मेज़बान की भूमिका निभाने वाले खरपतवारों के नाम हैं: बेंटग्रास (Agrostis), क्रैबग्रास (Digitaria), जॉनसन घास (Sorghum halepense), मार्निंग ग्लोरी (Ipomoea), नटगेज (Cyperus), पिगवीड (Amaranthus) और सैंडसपुर (Cenchrus tribuloides).

फॉल आर्मीवर्म का जीवनचक्र
फॉल आर्मीवर्म का जीवनचक्र 30 से 61 दिनों का होता है। इसकी वयस्क मादा एक बार में 50 से 200 तक अंडे देती है। मादाएँ 7 से 21 दिनों के अपने जीवनकाल 10 गुच्छों के रूप में 1700 से 2000 तक अंडे दे सकती हैं। ये अंडे 3 से 4 दिनों में फूट जाते हैं। तब इनसे लार्वा निकलता है। लार्वा की अवधि 14 से 22 दिनों की होती है। प्यूपा (pupa) की अवधि 7 से 13 दिनों का होता है।
बाँसवाड़ा ज़िले में कृषि अनुसन्धान केन्द्र, बोरवट फार्म के कीट विज्ञानी डॉ. आर. के. कल्याण ने बताया कि तीसरी अवस्था तक फॉल आर्मीवर्म के लार्वा को पहचानना मुश्किल है। लेकिन यह जैसे-जैसे बड़ा होता जाता है, वैसे-वैसे इसकी पहचान आसान हो जाती है। इसके सिर पर उल्टे वाई के आकार का निशान दिखायी देता है। इसके साथ ही लार्वा के 8वें बॉडी सेगमेंट पर 4 बिन्दुओं की वर्गाकार आकृति में देखी जा सकती है।

कैसे नुकसान पहुँचाते हैं फॉल आर्मीवर्म?
फॉल आर्मीवर्म के लार्वा, पौधों की पत्तियों को खुरचकर खाते हैं। इससे पत्तियों पर सफ़ेद धारियाँ दिखायी देती हैं। जैसे-जैसे लार्वा बड़े होते जाते हैं, वो पौधों की ऊपरी पत्तियों को खाने लगते हैं। इस तरह पत्तियों पर बड़े गोल-गोल छिद्र एक ही पंक्ति में नज़र आते हैं।
फॉल आर्मीवर्म पर नियंत्रण कैसे पाएँ?
- विशेषज्ञों के अनुसार, फॉल आर्मीवर्म से बचाव के लिए मक्का की अगेती बुआई करना सबसे कारगर उपाय है।
- एक खेत में एक बार मक्का की फ़सल लेने के बाद अगले साल उसी खेत में मक्का बोने से बचना चाहिए।
- प्यूपा से वयस्क बनने की अवस्था को रोकने के लिए खेत में 250 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से नीम की खली डालें।
- फेरोमोन ट्रैप (pheromone traps) और ब्लैकलाइट ट्रैप (blacklight traps) लगाकर फॉल आर्मीवर्म के मोथ (Moth) पर नज़र रखें और अंडे के गुच्छों को ढूँढकर उन्हें नष्ट कर दें।

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कीटनाशक से रोकथाम
फॉल आर्मीवर्म से बचने के लिए कीटनाशी का प्रयोग भी कर सकते हैं। एमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 100 ग्राम प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करें अथवा थियोडिकार्ब 75 एसपी 1 किलोग्राम अथवा फुबेंडोमाइड 480 एससी 150 एमएल अथवा क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी 1 लीटर अथवा स्पिनोसेड 45 ईसी 175 एमएल प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें।
(सभी चित्र: फ्लोरिडा विश्वविद्यालय से साभार)
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