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Millet Cultivation: बाजरे की खेती में किए कई उन्नत प्रयोग, इस महिला को मिल चुका है ‘कृषि पंडित पुरस्कार’

पहले नहीं होता था ख़ास उत्पादन, लेकिन कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह के बाद होने लगा अच्छा मुनाफ़ा

कर्नाटक के दावणगेरे ज़िले के नित्तूर गांव की रहने वाली सरोज एन. पाटिल ने अपने खेत में Integrated Farming का मॉडल अपनाया हुआ है। उन्होंने बाजरे की खेती से मुनाफ़ा कमाने की दिशा में जो कदम उठाया, उससे उनकी आमदनी में इज़ाफ़ा हुआ।

बाजारा जिसे अंग्रेज़ी में मिलेट (Millet) कहा जाता है, पौष्टिकता से भरपूर होता है और ठंड के मौसम में तो अक्सर इसे खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है। पहले तो सिर्फ़ गाँवों में ही लोग ज्वार, बाजरा जैसे मोटे अनाज खाना पसंद करते थे, लेकिन अब तो शहरों में भी लोग इसे खाना पसंद कर रहे है। बाजरे की खेती करने वाले किसान इसे न सिर्फ़ फसल के रूप में बेच सकते हैं, बल्कि मूल्य संवर्धन इकाई स्थापित कर इससे अन्य चीज़ें बनाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं। ऐसा ही कर रही हैं कर्नाटक की सरोज एन. पाटिल। 

कौन है सरोज एन. पाटिल?

सरोज एन. पाटिल कर्नाटक के दावणगेरे ज़िले के नित्तूर गांव की रहने वाली हैं। उनके पास खेती योग्य 11 हेक्टेयर भूमि है। सरोज और उनका परिवार धान, फिंगर मिलेट यानी रागी की GPU-28 किस्म, छोटा बाजरा (Minor Millet), नारियल और सुपारी की खेती करता है। इसके अलावा, उनके पास 7 गायें, 6 भैंसें और पोलट्री इकाई में 12 हज़ार पक्षी हैं। वो बाजरे से कई बाय-प्रॉडक्ट्स बना रही हैं। उनका Value Addition कर अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं। 

बाजरे की खेती
तस्वीर साभार: naturallyella

बाजरे की खेती में तकनीक को खेती से जोड़ा

उनके पास एक ट्रैक्टर, चारा काटने की मशीन, खरपतवार नियंत्रण के लिए तीन कोनोवीडर मशीनें, आटा चक्की (छोटे बाजरा से माल्ट बनाने के लिए) ये सब उनके खेत में लगे हुए हैं। सरोज और उनका परिवार सालों से ऑर्गेनिक फिंगर मिलेट का उत्पादन कर रहा है। आमतौर पर रागी की फसल कटने के बाद बिक्री के लिए सीधा बाज़ारों में ही जाती है। इस तरह लाभ का अनुपात कम हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि फसल उगाने की लागत, खासतौर पर कटाई और थ्रेसिंग का खर्च अधिक होता है। इसे देखते हुए सरोज ने वैल्यू एडिशन के बारे में सोचा।

सरोज पाटिल कृषि विज्ञान केंद्र की साइंटिफिक एडवाइज़री कमेटी की सदस्य भी हैं। उन्होंने मूल्य संवर्धन (Value Addition) से जुड़ी ट्रेनिंग लेने के बाद ही इसकी शुरुआत की। उनके उत्पादों को बेंगलुरू स्थित आईसीएआर-तरालाबालु कृषि विज्ञान केंद्र ने अपने कैंपस के ‘Saturday Organic Bazaar’ और दूसरी प्रदर्शनियों में बेचने का मौका दिया।

इन उत्पादों का करती हैं वैल्यू एडिशन

उन्होंने माल्ट बनाने के लिए एक छोटी आटा चक्की लगाई और 2014-15 में वैल्यू एडिशन शुरू कर दिया। उनके द्वारा तैयार उत्पादों में माल्ट, एनर्जी मिक्स, अचार, छोटे बाजरा की रोटी, ड्राई फ्रूट्स लड्डू, बाजरा पकोड़ा, रागी की सेवई आदि हैं। ‘थडवनम’ ब्रांड के तहत ये सभी उत्पाद बेचे जाते हैं, जो FASSI के तहत रजिस्टर्ड हैं। सरोज ने अपनी Value Addition Unit से 2019-20 में एक लाख 49 हज़ार का मुनाफ़ा कमाया। बाजरे की खेती के साथ ही उसे प्रोसेस करना, इससे मार्केट में उन्हें अपनी उपज का अच्छा दाम मिलता है। 

महिलाओं से आगे बढ़ने की अपील

सरोज पाटिल महिलाओं से अपील करने के साथ ही उन्हें सुझाव देती हैं कि वह अपनी पसंद और क्षमता के हिसाब से कृषि के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ें। सरोज कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग द्वारा आयोजित कई ट्रेनिंग कार्यक्रमों में बतौर गेस्ट जाती हैं और किसानों से अपने अनुभव साझा करती हैं। उन्हें खेती-किसानी के गुर सिखाती हैं। 

बाजरे की खेती
तस्वीर साभार: agricoop

मिल चुके हैं कई सम्मान

खेती-किसानी में उनकी उपलब्धियों को लेकर उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। 2011 में कर्नाटक सरकार द्वारा ‘पर्यावरण पुरस्कार’ (Environment Award), 2008-09 कर्नाटक सरकार द्वारा ‘कृषि पंडित’ पुरस्कार और 2013 में महिंद्रा एंड महिंद्रा समूह द्वारा ‘महिंद्रा समृद्धि कृषि पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। 

ये भी पढ़ें: खरीफ़ फसलों में लगने वाले खरपतवारों की रोकथाम कैसे करें? जानिए कृषि विशेषज्ञ डॉ. संदीप कुमार सिंह से

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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