कोरोना काल में बहुत से लोग नौकरी से हाथ धो बैठे थे, केरल के कुन्नूर जिले के रहने वाले आईटी प्रोफेशनल ब्रिजिथ कृष्णा भी उन्हीं लोगों में से एक थे, मगर नौकरी जाने के बाद मायूस होकर वह हाथ पर हाथ रखे बैठे नहीं रहें। वह अपने गांव उलीकल (कुन्नूर जिले में स्थित) लौट आए और पारंपरिक काजू की खेती में परिवार का साथ देने लगे। कुन्नूर जिले में बड़े पैमाने पर काजू का उत्पादन होता है, लेकिन बरसात के मौसम में काजू भीगने से बड़े पैमाने पर फसल बर्बाद हो जाती है क्योंकि उन्हें खरीददार नहीं मिलते। इस स्थिति को देखकर कृष्णा ने एक नया आइडिया निकाला अंकुरित काजू का व्यवयास करने का और कुछ ही समय में यह आइडिया हिट भी हो गया।
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कैसे शुरू हुआ सफर?
नौकरी जाने के बाद वह अपने गांव में काजू की खेती करने लगे। मॉनसून के दौरान उन्होंने देखा की बड़ी मात्रा में फसल भीगने से उसे कोई खरीददार नहीं मिल रहे और उनकी 3 क्विंटल काजू की फसल बरसात में ऐसे ही भीग रही है। एक दिन उन्होंने कुछ गीले काजू को ध्यान से देखा तो उन्होंने पाया कि काजू अंकुरित हो चुके हैं, बस यहीं से उनके दिमाग में एक नया बिज़नेस आइडिया आया और उन्होंने अंकुरित काजू का व्यवसाय शुरू कर दिया। गीले काजूओं की बाजार में बिल्कुल मांग नहीं है, लेकिन यदि इन्हें अंकुरित करके बेचा जाए तो हेल्दी स्नैक्स के रूप में इसकी कमर्शियल वैल्यू अधिक मिलेगी।

अंकुरण के लिए तैयार की परिस्थितियां
ब्रिजित कृष्णा ने अपने कौशल और पत्नी श्रीशमा के कंप्यूटर एप्लीकेशन के कौशल का इस्तेमाल करके ऐसी आधारभूत सरंचना तैयार कि जहां काजुओं को अंकुरित होन के लिए उचित वातावरण मिल सके। इसके लिए उन्होंने सस्ते ह्यूमिडिफायर, वैक्यूम ड्रायर, सटरलाइजेशन उपकरण का इस्तेमाल किया। इनके द्वारा तैयार खास ट्रे में काजू रखने के 16 दिन बाद उनका स्वाद बहुत बढ़िया हो जाता है।
नई तकनीक से मिली मदद
अपने काम को और बेहतरीन तरीके से करने के लिए उन्हें नई तकनीक की ज़रूरत महसूस हुई और इसके लिए उन्होंने केरल कृषि विश्वविद्यालय के कृषि उद्यम विभाग और काजू अनुसंधान स्टेशन, मदक्कथरा से संपर्क किया, जहां से उन्हें इस संबंध में नई जानकारी और तकनीक के बारे में पता चला। इससे वह अपने अंकुरित काजू का उत्पादन बढ़ाने में कामयाब रहे।
पौष्टिकता से भरपूर
अंकुरित काजू पर किए लैब टेस्ट से पता चला कि इसमें पौष्टकि तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। इसमें आयरन, कैल्शियम और अमीनो एसिड की उच्च मात्रा थी, इसके अलावा अंकुरण प्रक्रिया के दौरान इसमें फैट की मात्रा भी घटकर आधी हो जाती है यानी यह और अधिक हेल्दी बन जाता है। अंकुरित काजू का इस्तेमाल सब्ज़ी, फलों के सलाद, सूप, ब्रेड स्प्रेड, मिल्कशेक आदि में किया जाता है। ब्रिजिथ और उनकी पत्नी ने इससे अलग-अलग तरह के व्यंजन बनाकर दोस्तों व रिश्तेदारों में बांटना शुरू किया और लोगों को यह बहुत पसंद भी आया। इसके बाद यह संभावित ग्राहकों के लिए खुदरा स्टोर की तरफ आकर्षित हुए।

बनाया खुद का ब्रांड
नवंबर 2020 में ‘Eatery malabarikas’ नामक उद्यम की स्थापना की और ‘Kajusprouty’ ब्रांड बनाया। वैसे तो राज्य में पारंपरिक रूप से अंकुरित काजू जिसे Mazhayandi कहते हैं जो बारिश में अंकुरित होते हैं। उनका उपयोग पहले से ही किया जाता है, मगर राज्य में व्यवसायिक स्तर पर अंकुरित काजू का पहली बार इस्तेमाल ब्रिजिथ ने किया।
मूल्य संवर्धन उत्पाद
ब्रिजिथ लगातार अपने व्यवसाय को बढ़ा रहे हैं। वह अंकुरित काजू से अचार, स्प्राउड सूप मिक्स, बिस्किट जैसे मूल्य संवर्धन उत्पाद भी बना रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने नई अंकुरण तकनीक अपनाकर न सिर्फ काजू की सेल्फ लाइफ (यानी वह जल्दी खराब नहीं होगा) बढ़ाने में कामयाबी पाई, बल्कि अब वह पूरे साल अंकुरित हो सकती है। पहले काजू सिर्फ 90 दिनों तक ही अंकुरित होता था। वह काजू को पूरी तरह से ईको फ्रेंडली तरीके से अंकुरित करते हैं।

ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री
कृष्णा अपने उत्पाद को सीधे खुदरा दुकानों पर बेचने के साथ ही ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के ज़रिए भी बेच रहे हैं। वह ई-कॉमर्स को किफायती और सुविधाजनक मानते हैं। वह दुबई और शारजहां जैसे देशों में अपने उत्पाद निर्यात भी करते हैं। 2020-21 में उनका टर्नओवर 14 लाख रुपए था। कृष्णा की चाह अब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार पर कब्जा करके ग्लोबल ब्रांड बनने की है।
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