हल्दी की खेती में किस तरह से उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल करके एक महिला ने फसल उत्पादन में बढ़ोतरी की, साथ ही कैसे एक बड़ी समस्या का हल भी निकाला, हम आपको इस लेख में बताएंगे। हल्दी को अगर सर्वगुण संपन्न मसाला कहें तो गलत नहीं होगा, क्योंकि खाने की रंगत निखारने के साथ ही यह त्वचा की रंगत निखारने और कई बीमारियों में औषधि के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।
आयुर्वेद में तो इसे बेहतरीन औषधि माना गया है, इसलिए भोजन में हल्दी के इस्तेमाल की सिफारिश की गई है। यह एक ऐसा मसाला है जिसकी मांग कभी कम नहीं होती। कोरोना में तो इसकी मांग और भी कई ज़्यादा बढ़ गई। हमारे देश में सबसे ज़्यादा हल्दी का उत्पादन आंध्र प्रदेश में होता है। इसके बाद ओडिशा, तमिलनाडू और महाराष्ट्र का नंबर आता है। हल्दी की खेती (Turmeric Cultivation) में मिट्टी में नमी का होना बहुत ज़रूरी है। नमी न होने पर अच्छी फसल नहीं होती है। ऐसे में झारखंड के छत्र ज़िले के मर्दनपुर गांव की सरोज लकड़ा ने कम नमी की समस्या को दूर करने के लिए Moisture Retention Technique (नमी को बनाए रखने की तकनीक) ईज़ाद की है।

हल्दी की खेती में ध्यान रखें ये बातें
हल्दी की खेती आमतौर पर मई-जून के बीच की जाती है। इसके अलावा, जिन इलाकों में सिंचाई की अच्छी सुविधा नहीं होती, वहां मॉनसून की शुरुआत यानी जुलाई में भी इसकी खेती की जा सकती है। एक बात का ध्यान रहे कि हल्दी की खेती के लिए खेत में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होना ज़रूरी है, वरना फसल खराब हो जाएगी। हल्दी की खेती के लिए ज़मीन का नम होना ज़रूरी है, ऐसे में खुले खेत में खेती करने पर सिंचाई की ज़रूरत पड़ती है, लेकिन यदि इसकी मिश्रित खेती की जाती है यानी किसी अन्य फसल के बीच में अगर हल्दी बोई जाती है तो पेड़ की छाया के कारण मिट्टी की नमी बनी रहती हैं, जिससे कम सिंचाई करने की आवश्यकता पड़ती है।

बुवाई का तरीका
हल्दी के बीज छोटे-छोटे दाने नहीं होते, बल्कि हल्दी के अंकुरित टुकड़ों को ही बोया हो जाता है, जिसे प्रकंद या राइजोम कहते हैं। बीज के रूप में मदर राइजोम का ही इस्तेमाल करना चाहिए। वैसे तो हल्दी की खेती सभी तरह की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन दोमट, जलोढ़, लैटेराइट मिट्टी, जिसमें जीवांश की मात्रा अधिक हो, वह इसकी खेती के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है।
हल्दी की किस्में
हल्दी की कुछ उन्नत किस्मों की खेती करके किसान अधिक मुनाफ़ा कमा सकते हैं। इसमें शामिल हैं सी.एल. 326 माइडुकुर, सी.एल. 327 ठेकुरपेन्ट, कस्तूरी, पीतांबरा, रोमा, सोनाली, सूरमा, प्रतिभा, प्रभा, सुगुना, सुदर्शन, सुवर्णा, आई.आई.एस.आर. प्रगति आदि।

क्या है Moisture Retention Technique?
झारखड़ की रहने वाली 40 वर्षीय सरोज लकड़ा एक अभिनव किसान हैं यानी वह खेती में नए प्रयोग करती रहती हैं। उनके पास 4 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि हैं। सरोज को हल्दी की खेती के दौरान हमेशा नमी की कमी की समस्या का सामना करना पड़ता था, जिसे दूर करने के लिए उन्होंने एक नई तकनीक Moisture Retention Technique (नमी को बनाए रखने की तकनीक) का विकास किया।
सरोज ने जो तकनीक ईज़ाद की उसमें एक किलो गाय के गोबर को 5 लीटर पानी में घोला जाता है और इसमें मदर राइजोम का 6 घंटे के लिए भिगोया जाता है। राइजोम को वर्मी कंपोस्ट के ऊपर एक खांचे में रखा जाता है। इसके बाद राइजोम की बुवाई की जाती है। इस संशोधित विधि के इस्तेमाल से अंकुरण का प्रतिशत बढ़ गया। साथ ही यह तकनीक फसल को जड़ सड़न रोग से भी बचाती है और पौधे स्वस्थ रहते हैं। इसमें मौजूद वर्मी कंपोस्ट, मिट्टी की नमी को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है। इस विधि से हल्दी की खेती करने से उसके रंग और गुणवत्ता में भी सुधार देखा गया। उनका फसल उत्पादन पारंपरिक विधि की तुलना में करीब 10 प्रतिशत बढ़ गया।

हल्दी की खेती में सरोज को इतना हुआ मुनाफ़ा
सरोज को हल्दी उत्पादन की कुल लागत प्रति हेक्टेयर में करीब 55 हज़ार रुपये पड़ी। इससे उन्हें प्रति हेक्टेयर एक लाख 85 हज़ार रुपये की आमदनी हुई यानी कि उन्हें एक लाख 30 हज़ार रुपये का सीधा मुनाफ़ा हुआ। सरोज द्वारा ईज़ाद की गई इस तकनीक को छत्र ज़िले के करीबन 460 हल्दी उत्पादक किसान अपनाकर लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें: हल्दी की खेती में लागत कम और मुनाफ़ा ज़्यादा
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

ये भी पढ़ें:
- कामधेनु योजना: 25 दुधारू पशुओं पर मिलेगी 13 लाख तक की सब्सिडी, जानिए पूरा प्रोसेसमानक डेयरी इकाई का आकार 25 दुधारू पशु है। लाभार्थी अपनी भूमि और रिपेमेंट कैपिसिटी के आधार पर, अधिकतम 8 इकाइयों (यानी 200 पशुओं) तक के लिए अप्लाई कर सकते हैं
- प्राकृतिक खेती से बचित्र सिंह चौहान ने बदली अपनी ज़िंदगी, नौकरी छोड़कर बने सफल किसानबचित्र सिंह चौहान ने प्राकृतिक खेती अपनाकर खेती की लागत घटाई और अपने खेत को दूसरे किसानों के लिए सीखने का केंद्र बनाया।
- देशी पशुओं की नस्लों को मिली नई पहचान: कोप्पल गाय से लेकर तमिलनाडु का कोम्बई कुत्ता भी इस लिस्ट मेंहर नस्ल को एक Unique Accession Number दिया गया है। जैसे कोप्पल गाय (Koppal cow) का नंबर है INDIA_CATTLE_0800_KOPPAL_03056। ये नंबर उस नस्ल की पहचान का साइंटिफिक बेस्ड बनेगा।
- खेत बचाओ अभियान क्या है? शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को बताई मिट्टी की सेहत सुधारने की राहखेत बचाओ अभियान के तहत शिवराज सिंह चौहान ने खाद के संतुलित इस्तेमाल, फ़सल चक्र और प्राकृतिक खेती अपनाने पर ज़ोर दिया। जानें क्या हैं ज़रूरी उपाय।
- International Rice Conference का आगाज़: दिल्ली में 150 देशों के कारोबारियों का जमावड़ा, 200 चावल किस्मों का प्रदर्शनInternational Rice Conference में 150 से ज़्यादा देशों के ख़रीदार हिस्सा ले रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक 4,649 खरीदारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें कुवैत, दक्षिण अफ्रीका, बेनिन, नाइजीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे प्रमुख देश शामिल हैं।
- यूपी सरकार का नया ‘आत्मनिर्भरता मॉडल’, ललितपुर बनेगा प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती ज़िलासरकार की योजना है कि गोशालाओं से निकलने वाले गोबर और अन्य जैविक संसाधनों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाए।
- शिवराज सिंह चौहान ने 7th AgriVoltaics World Conference में बताया खेती और बिजली उत्पादन का तरीक़ाशिवराज सिंह चौहान ने 7th AgriVoltaics World Conference में खेती के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन, छोटे किसानों की सुरक्षा और ग्रामीण रोज़गार पर ज़ोर दिया।
- ‘7th Agrivoltaics World Conference’ का आगाज़: शिवराज सिंह चौहान बोले-किसान अब ऊर्जादाता भी बनेगाभारत मंडपम में तीन दिवसीय ’77th Agrivoltaics World Conference’ का उद्घाटन हुआ। मंच पर जर्मनी के राजदूत डॉ. जैस्पर विक, ISA के महानिदेशक आशीष खन्ना, सचिव संतोष कुमार सारंगी, अतीश चंद्रा और डॉ. मांगी लाल जाट सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
- प्राकृतिक खेती से प्रवीण कुमार ने बदली खेती की राह, कम ख़र्च में उगा रहे बेहतर सब्ज़ियांप्रवीण कुमार ने प्राकृतिक खेती अपनाकर खेती का ख़र्च घटाया और बिना रसायनों के सब्ज़ियां उगाकर दूसरे किसानों के लिए मिसाल पेश की।
- India-New Zealand FTA ऐतिहासिक समझौता लागू : निर्यातकों को शुल्क-मुक्त बाज़ार,35,000 करोड़ के व्यापार का रास्ता खुलान्यूजीलैंड अगले 15 सालों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के Foreign Direct Investment को बेहतर बनाने पर सहमत हुआ है, जिससे भारत में बुनियादी ढांचे और इनोवेशन को बल मिलेगा।
- त्रिपुरा में Oil Palm की खेती: किसानों की कमाई का नया रास्ता, लग रहीं प्रोसेसिंग फैक्ट्रियांत्रिपुरा की जलवायु ऑयल पाम के लिए अनुकूल मानी जाती है। मुफ्त पौधे, आर्थिक सहायता, तय कीमत और प्रसंस्करण सुविधाओं के संयोजन से ऑयल पाम किसानों के लिए पारंपरिक फसलों के अलावा कमाई का भरोसेमंद विकल्प बन सकता है।
- डॉ. अभिलक्ष लिखी ने उत्तराखंड में ट्राउट मछली पालन का जायज़ा लिया, किसानों की आय बढ़ाने पर ज़ोरडॉ. अभिलक्ष लिखी के मुनस्यारी दौरे में ट्राउट पालन, सरकारी योजनाओं, वैज्ञानिक मदद और नेपाल को निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
- चाय में कीटनाशक की नई सीमा: भारत ने जापान और अमेरिका से भी कड़ा रुख़ अपनायाKisan of India को Google पर जोड़ें चाय प्रेमियों और चाय उद्योग (Tea lovers and the tea industry) से जुड़े लाखों लोगों के लिए एक बड़ी ख़बर है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चाय में इस्तेमाल होने वाले दो कीटनाशकों एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड (Pesticides acetamiprid and imidacloprid) के अवशेषों की अधिकतम सीमा… Read more: चाय में कीटनाशक की नई सीमा: भारत ने जापान और अमेरिका से भी कड़ा रुख़ अपनाया
- ‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ’ अभियान से हिमाचल के किसानों को घर बैठे मिलेगी फसल बीमा की पॉलिसी, जानिए प्रोसेसआंकड़ों पर नजर डालें तो ‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ’ अभियान काफी बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है। जिले में कृषि लोन लेने वाले कुल 13,241 किसानों ने अपनी मक्का और धान की फसलों का बीमा कराया है।
- खेत बचाओ अभियान 2026: शिवराज सिंह चौहान की देश के 11 राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक, व्यापक जनभागीदारी का लक्ष्यकृषि मंत्री चौहान ने महत्वाकांक्षी ‘खेत बचाओ अभियान’ की तैयारियों को लेकर राज्यों के कृषि मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की
- ZT Lalrithangi और Priyanka Mahesh Shelke ग्रामीण महिलाओं और किसानों के लिए बनीं मिसालZT Lalrithangi और Priyanka Mahesh Shelke को इटली में FAO के ‘100 Women Heroes in Agrifood Systems and Rural Development’ सम्मान से नवाजा गया।
- Self-Help Group women कैसे बन रहीं आत्मनिर्भर, 3 करोड़+ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिलSelf-Help Group women कैसे बन रहीं आत्मनिर्भर? जानें लखपति दीदी का लक्ष्य, ग्रामीण कारोबार और SARAS मेले से जुड़े मौक़े।
- राजस्थान के किसानों को बड़ी सौगात: फ्री मिलेगा सरसों का उन्नत बीज, कम पानी में होगी दोगुनी कमाईइस योजना के तहत सरसों की नई उन्नत किस्म आरएच-1706 दी जाएगी, जिसे 2023 में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने विकसित किया है।
- ESTIC 2026 में ICAR दिखाएगा कृषि की नई तकनीकें, जलवायु के अनुकूल फ़सलों से लेकर AI तक पर रहेगा ज़ोरICAR के ESTIC 2026 प्रदर्शन में जीन एडिटिंग, मिट्टी की जांच में AI, पशु स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी नई कृषि तकनीकें देखने को मिलेंगी।
- World Food Day 2026: अन्न से अन्नदाता तक, जब भारत की थाली दुनिया का पेट भरेगीWorld Food Day 2026: भारत में हर साल लगभग 68.9 मिलियन टन खाद्य पदार्थ बर्बाद होता है, जिसकी कीमत 1.53 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।





















