पूरी दुनिया में भारत दूध के उत्पादन में अव्वल है, लेकिन यहां के पशु मालिक पैसों के अभाव में अपने पशुओं को पौष्टिक चारा नहीं खिला पाते हैं। ऐसे में अनानास फल के अवशेष से बना हरा चारा उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। ये न सिर्फ पौष्टिक है, बल्कि क़िफायती भी है।
अनानास का स्वाद तो हर किसी को भाता ही है, हमारे देश में इस फल के अवशेष की मात्रा भी बहुत अधिक है। चूँकि अनानास फल के अवशेष में नमी और शक्कर की मात्रा बहुत अधिक होती है, इसलिए इसमें फंगल (कवक) का विकास जल्दी होता है। यह 2 दिन के अंदर ही खराब हो जाता है, लेकिन एक नई तकनीक की बदौलत ऐसे अवशेषों को हरे पशु चारे में बदलकर इसका सदुपयोग किया जा सकता है।
क्या है अनानास फल अवशेष की साइलेज तकनीक?
भारत में करीब 1.3 मिलियन टन अनानास फल अवशेष बर्बाद होते हैं, क्योंकि यह खाने योग्य नहीं होते। अब साइलेज तकनीक की बदौलत अवशेषों की गुणवत्ता को बनाए रखकर पशु चारे में तब्दील किया जा रहा है। अनानास फल के अवशेषों को 1-2 इंच के टुकड़ों में काटा जाता है और ड्रम/बैग में 65% नमी के साथ एयर-टाइट स्थिति में जमा किया जाता है। यानी कि जिस डिब्बे में रखा जाता है उसमें हवा बिल्कुल नहीं जाती। इसमें 4:1 के अनुपात में अनानास के ऊपर के पत्ते और फलों के छिलके रखे जाते हैं। 20 दिनों की अवधि में अच्छी गुणवता वाले अनानास फल का अवशेष साइलेज तैयार हो जाता है, जिसमें पोषक तत्व मकई जैसे हरे-चारे से भी अधिक होता है।

दूध उत्पादन में वृद्धि
भेड़ों को अनानास फल अवशेष आधारित साइलेज खिलाने से उन पर कोई प्रतिकूल असर नहीं दिखा। डेयरी की गायों पर किए गए एक अध्ययन के मुताबिक साइलेज आधारित डायट देने पर नियमित दूध में 20% का सुधार देखा गया और इसमें फैट की उपस्थिति 0.6 यूनिट थी। इस तकनीक का लाइसेंस M/s. फ्रेश फ्रूट्स प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया है, जो ड्रम या बैग में अनानास फल के अवशेषों से साइलेज बनाकर इसे हरे चारे के रूप में बाजार में उपलब्ध कराता है।

हरे चारे की कमी होगी दूर
इस तकनीक से ऐसे इलाकों में जहां अनानास की भरपूर खेती होती है, वहां पशुओं को हरे चारे की कमी नहीं होगी।
तकनीक की खासियत
- यह अनानास फल के अवशेष से साइलेज बनाने की तकनीक है।
- यह सांद्रण के साथ अनानास फल के अवशेषों को साइलेज यानी पशुओं के लिए हरे चारे के रूप में इस्तेमाल करती है।
- अनानास फल के अवशेष हरे चारे के रूप में इस्तेमाल हो सकते हैं।
- अनानास फल के अवशेष से बना चारा मकई के हरे चारे से अधिक पौष्टिक होता है
- अनानास फल के अवशेष से बना साइलेज, दूध के उत्पादन में सुधार करने के साथ ही दूध में फैट की मात्रा में भी सुधार लाता है।
- इसकी लागत अन्य पशु चारे से कम है।
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प्रशिक्षण की ज़रूरत
डेयरी व पशु मालिकों को इस तकनीक का फायदा मिले इसके लिए अनानास फलों के अवशेषों से साइलेज तैयार करने और दूध उत्पदान बढ़ाने के लिए उन्हें प्रशिक्षण दिए जाने की ज़रूरत है। यह प्रशिक्षण ICAR-NIANP, बंग्लुरू में उपलब्ध है।
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