केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिन्ता और चुनौती का विषय है। इससे निपटने के लिए सभी केवीके और आईसीएआर के संस्थानों तथा अन्य वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण निभानी होगी। इसके लिए रोडमैप बनाकर आगे बढ़ने की ज़रूरत है ताकि देश को परिणाम दिया जा सके और भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात की स्थितियाँ भी और अच्छी बन सकें।
नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 94 स्थापना दिवस समारोह में कृषि मंत्री ने कहा कि बीते 93 साल में आईसीएआर ने करीब 5800 फसलों और बागवानी की नई किस्मों की खोज की है। इनमें जलवायु अनुकूल व फोर्टिफाइड किस्में भी शामिल हैं। इनमें से वर्ष 2014 के बाद 2000 हजार किस्मों की खोज आईसीएआर की बड़ी उपलब्धि है।
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स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में कृषि शामिल
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के विजन पर नई शिक्षा नीति का उदय हुआ। अब स्कूली शिक्षा में कृषि पाठ्यक्रम का समावेश किया जा रहा है। कृषि शिक्षा संस्थान, नई शिक्षा नीति को कैसे अंगीकार करें? यह काम आगे बढ़कर आईसीएआर ने किया है। इसका सद्परिणाम आगे देखने को मिलेगा। उन्होंने कृषि उत्पादकता के क्षेत्र में काम करने सहित दलहन, तिलहन, कपास उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी आईसीएआर व केवीके को संकल्पबद्ध होकर प्रयास करने को कहा।
इससे पहले देश के विभिन्न हिस्सों के कुछ किसानों से कृषि मंत्री ने ऑनलाइन संवाद किया। हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात आदि के किसानों से कृषि मंत्री की चर्चा में यह बात उभरी कि सरकारी योजनाओं, संस्थागत सहयोग से इनकी आय बढ़ रही हैं, जीवन स्तर सुधर रहा है।
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75 हजार किसानों की सफलता का संकलन
कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि जब कृषि शोध संस्थान में बीज तैयार होता है तो किसानों को इसका भरपूर लाभ मिलता है तो उन्हें भी काफी खुशी मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि सब कुछ अच्छा होने के बाद भी किसानों को प्रकृति पर निर्भर रहना पड़ता है। तोमर ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है क्योंकि आईसीएआर ने गत वर्ष तय किया था कि आजादी के अमृत महोत्सव में ऐसे 75 हजार किसानों से चर्चा कर उनकी सफलता का दस्तावेजीकरण किया गया है।
इस अवसर पर 75 हजार की सफलता की कहानियों के संकलन की ई-बुक जारी किया गया जिनकी आय दोगुनी या इससे ज्यादा बढ़ी है। उन्होंने कहा कि आईसीएआर के इस स्थापना दिवस को संकल्प दिवस के रूप में बनाया जाए, ताकि आज नए संकल्प लेकर किसानों की मदद की जा सके। कई किसान आईसीएआर पर भरोसा करते हैं और सरकार भी उनकी मदद करती है।
मिट्टी की जाँच सबसे उपयोगी
इस अवसर पर मत्स्य पालन और पशुपालन मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए जो तकनीक बना रहे हैं, उसके साथ उनकी मदद करें न कि उनके काम में बाधा डालें। देश के कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड दिया है, जो आज के समय में किसानों के लिए सबसे उपयोगी है।
आत्मनिर्भर भारत में किसानों का बड़ा योगदान
कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने आईसीएआर को बधाई देते हुए कहा कि इसने किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। देश किसानों के लिए एक लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसमें किसानों की आय, नई तकनीक, वित्तीय सहायता, फसल बीमा को ध्यान में रखा जाएगा। इसके अलावा सरकार 10 हजार एफपीओ बनाएगी, जिससे किसान आसानी से देश के किसी भी कोने में अपनी उपज बेच सकें।
भारतीय खेती की दो धाराएँ
नीति आयोग के सदस्य डॉ. रमेश चंद ने कहा कि हरेक इन्स्टीट्यूट को अपना ऐसा संकल्प बनाना चाहिए जो सबका संकल्प बन जाये। आईसीएआर ने केवीके माध्यम से जो भी उपलब्धि हासिल की है वो लोगों को भागीदार बनाकर की है। पिछले 75 साल में ग्रीन रेव्यूलूशन का इंजन जेनेटिक इंप्रूवमेंट से हुआ है। भारत सरकार बड़ी जिम्मेदारी के साथ दो रास्तों पर चल रही है। एक ओर परम्परागत खेती पर ज़ोर दिया जा रहा है तो दूसरी ओर खेती में विज्ञान और वैज्ञानिक सोच को ज़्यादा से ज़्यादा अपनाने पर भी पूरी ध्यान रखा जा रहा है।
फसल रोगों की रोकथाम में अधिक काम हो रहा है
इस मौके पर आईसीएआर महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने बताया कि 1 से 2 अक्टूबर के बीच किसानों को कई तरह से मदद करने के लिए एक टोल फ्री नंबर जारी किया जाएगा। इससे फसलीय रोगों की रोकथाम में बहुत मदद मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि रंगीन मछली, मशीनीकरण, खाद्य और कृषि के लिए कई कदम उठाए गए हैं और भविष्य में और भी कई कदम उठाए जाएंगे।
इस वर्ष, आईसीएआर ने 15 विभिन्न पुरस्कारों के तहत 92 पुरस्कार विजेताओं का चयन किया, जिनमें 4 संस्थान, 1 अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना, 4 कृषि विज्ञान केंद्र, 67 वैज्ञानिक और 11 किसान शामिल थे, जिनमें से 8 महिला वैज्ञानिक और किसान थे।

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