मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय है, जिसमें बहुत अधिक लागत के बिना अच्छा मुनाफ़ा कमाया जा सकता है। जिन किसानों के पास खेती योग्य भूमि कम है, उनके लिए यह अतिरिक्त आमदनी का बेहतरीन ज़रिया है। पंजाब के लुधियाना के रहने वाले किसान जसवंत सिंह तिवाना ने कभी सिर्फ़ 2 बक्सों से मधुमक्खी पालन व्यवसाय की शुरुआत की थी। आज उनकी गिनती पंजाब के सफल मधुमक्खी पालकों में होती है।
वह दूसरे किसानों को भी इसे अपनाने की सलाह देने के साथ उनका मार्गदर्शन भी करते हैं। मधुमक्खी पालन व्यवसाय में कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो इसमें मुनाफ़े की गुंजाइश अधिक है। मधुमक्खी पालन के अपने 4 दशक के सफर और इस व्यवसाय से जुड़ी अन्य ज़रूरी बातों पर उन्होंने किसान ऑफ़ इंडिया की संवाददाता दीपिका जोशी से ख़ास बातचीत की।

ट्रेनिंग लेने के बाद शुरू किया व्यवसाय
लुधियाना के रहने वाले किसान जसवंत सिंह तिवाना के पास बहुत कम ज़मीन थी। उन्होंने खेती के साथ ही इलेक्ट्रिशियन का काम भी शुरू कर दिया, मगर कुछ ख़ास आमदनी नहीं होती थी। इसी बीच उनके एक दोस्त ने उन्हें बताया कि पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में मधुमक्खी पालन पर ट्रेनिंग दी जा रही है। फिर क्या था, जसवंत सिंह ने वहां जाने का फैसला किया और उनकी ज़िंदगी में निर्णायक बदलाव आ गया। करीब एक हफ़्ते की ट्रेनिंग के दौरान ही मधुमक्खी पालन की बारीकियां सीखने के बाद उन्होंने मधुमक्खी पालन व्यवसाय को आगे बढ़ाने का फैसला किया।
दरअसल, ट्रेनिंग लेने के पहले से ही वह दो बॉक्स मधुमक्खी पाल रहे थे, लेकिन प्रशिक्षण के बाद उन्हें इस काम में ज़बरदस्त सफलता मिलती। अगले 6 महीने के अंदर ही उनके बक्सों की संख्या 2 से 15 पहुंच गई। इस सफलता से जसवंत सिंह तिवाना का मनोबल बढ़ा और फिर वो अपने मधुमक्खी पालन व्यवसाय को पुरज़ोर से आगे बढ़ाने के लक्ष्य में लग गए।

Tiwana Bee Farm के नाम से बनाया ब्रांड
जसवंत सिंह अपने व्यवसाय को ‘Tiwana Bee Farm’ के नाम से चलाते हैं। इसी ब्रांड के तहत अपने उत्पाद बेचते हैं। उनकी अपनी शहद प्रोसेसिंग यूनिट भी है, जिसमें वह नेचुरल शहद तैयार करने के अलावा, मधुमक्खियों के छत्ते से वैक्स और हनी बॉक्स भी खुद ही बनाते हैं। वह मधुमक्खी पालन व्यवसाय के लिए ज़रूरी हनी एक्सट्रेक्टर, बी-बॉक्स, बोतल सीलिंग मशीन, हनी प्रोसेसिंग प्लांट, पॉलन निकालने की मशीन, मधुमक्खी का जहर निकालने की मशीन, स्मोकर्स जैसे कई उपकरण भी बनाते हैं। वह ये उपकरण किफ़ायती कीमतों पर अन्य किसानों को उपलब्ध कराते हैं।

विदेशों में भी है मांग
जसवंत सिंह ने 1983 में मधुमक्खी पालन व्यवसाय की शुरुआत की थी। उस दौर में लोगों का इस व्यवसाय की ओर ज़्यादा रुझान नहीं था। अपना बाज़ार बनाने में उन्हें ज़्यादा दिक्कत नहीं हुई। उन्होंने अपने ब्रांड के प्रॉडक्ट्स की गुणवत्ता के बलबूते पर ग्राहक बनाए हैं। जसवंत सिंह तिवाना अपने शहद में कोई केमिकल या प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल नहीं करते। पैकेजिंग का काम भी अपनी यूनिट में ही करते हैं।

Tiwana Bee Farm उत्पादों की मांग सिर्फ़ भारत ही नहीं, बल्कि कनाडा और अमेरिका जैसे देशों में भी है। उनका कुल सालाना टर्नओवर लगभग 2 करोड़ रुपये के आसपास है और उन्होंने अपने इस व्यवसाय के ज़रिए कई लोगों को रोज़गार भी दिया है।

क्यों पालते हैं इटालियन बी?
जसवंत सिंह तिवाना इटालियन बी मधुमक्खी का पालन करते हैं। उन्होंने बताया कि इटालियन बी मधुमक्खी से शहद का उत्पादन ज़्यादा होता है। ये काटती भी कम है। फ़्रेंडली स्वभाव की होती हैं। उनके मुताबिक, इटालियन बी मधुमक्खी के एक बॉक्स से सालाना 50 से 60 किलो तक शहद प्राप्त हो जाता है और इनके एक बॉक्स से तीन और बॉक्स भी बन जाते हैं।

मधुमक्खी पालन व्यवसाय में किन बातों का रखें ध्यान
जसवंत सिंह तिवाना कहते हैं कि अगर ये व्यवसाय सही तरीके से किया जाए तो इसमें किसी तरह की दिक्कत नहीं आती, लेकिन मई-जून के महीने में इस व्यवसाय की शुरुआत नहीं करनी चाहिए क्योंकि तब फूल कम होते हैं, जिससे मधुमक्खियां शहद नहीं बना पाती हैं। जिस मौसम में फूल खूब खिले हों उस समय इस काम की शुरुआत करना अच्छा होता है।
बेकार पड़ी चीज़ों से बनाए थे बी-बॉक्स
जसवंत सिंह तिवाना कम लागत में काम शुरू करने के अपने अनुभव साझा करते हुए कहते हैं कि उन्होंने शुरुआत में बी बॉक्स खरीदने के बजाय सेब के बॉक्स, गत्ते के बॉक्स और कपड़े के बॉक्स बनाकर मधुमक्खियां पाली थीं। जब आमदनी होने लगी, तो बी-बॉक्स खरीदें। साथ ही वो सलाह देते हैं कि कहीं से ट्रेनिंग लेने के बाद इस व्यवसाय को शुरू करें। जसवंत सिंह तिवाना अब तक कई युवाओं और किसानों को मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग दे चुके हैं।

छोटे स्तर पर शुरुआत
जिन किसानों की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है वह छोटे स्तर पर भी मधुमक्खी पालन व्यवसाय की शुरुआत कर सकते हैं। जसवंत सिंह तिवाना बताते हैं कि इसके लिए सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाती है। मान लीजिए यदि किसान ने इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 2 लाख का सामान खरीदा है तो 80 हज़ार रुपये की सब्सिडी मिल जाती है, जो सीधे उसके खाते में जाती है। इसी तरह से कई योजनाएं हैं, जो मधुमक्खी पालकों को आर्थिक सहायता मुहैया कराती हैं।
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