Spinach Varieties | देश में पालक की खेती सर्दी और गर्मी दोनों मौसम में की जाती है, लेकिन अधिकतर सर्दी के समय पालक की खेती ज़्यादा होती है। सर्दी के समय बाज़ार में इसकी अच्छी मांग है, साथ ही इस समय इसको उगाना बहुत ही आसान है और पैदावार भी अच्छी मिलती है। पालक की खेती की बुवाई मैदानी जगहों में आमतौर पर जनवरी -फरवरी, जून-जुलाई या फिर सितंबर-नवंबर में होती है, जबकि पर्वतीय इलाकों में इसे अप्रैल से लेकर जून तक बोया जाता है।
पालक की खेती उत्तर प्रदेश, पंजाब, बंगाल, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश में ज़्यादा होती है। इसकी खेती से अधिक पैदावार के लिए अपने क्षेत्र और जलवायु की अनुसार किस्मों का चयन करना चाहिए।

अलग-अलग जगहों में देसी और विलायती, दो प्रकार का पालक उगाया जाता है। देसी पालक की बात करें तो इसके पत्ते चिकने अंडाकार, छोटे और सीधे दिखाई देते हैं, तो वहीं विलायती पालक के पत्तों के सिरे कटे हुए हैं। इसकी दो किस्में हैं, एक लाल सिरे वाली और दूसरी हरे सिरे वाली। इसमें हरे सिरे वाली को किसानों द्वारा ज्यादा पंसद किया जाता है, इसलिए मैदानी क्षेत्रों में इसे ही ज़्यादा उगाया जाता है। आइये जानते हैं पालक की उन्नत किस्मों के बारे में।
पालक की 10 उन्नत किस्में (10 types of Spinach)
1. ऑल ग्रीन– यह एक अधिक उपज देने वाली किस्म है और इसकी खेती सर्दी के मौसम में ज़्यादा की जाती है। इस किस्म के पौधे एक समान हरे, आकार में चौड़े और मुलायम होते हैं। बुवाई से करीब 35 से 40 दिन में फ़सल तैयार होती है। लगभग 20 से 30 दिन के अन्तराल पर इसके पत्ते कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं। इस किस्म की 6 से 7 बार कटाई आसानी से की जा सकती है। इस किस्म से 12 से 14 टन प्रति एकड़ पैदावार मिलती है।

2. पंजाब ग्रीन – इस किस्म की खेती पंजाब और इसके आसपास के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। इस किस्म के पत्ते चमकीले हरे रंग के होते हैं। इस किस्म की 6 से 7 बार कटाई आसानी से की जा सकती है। ये किस्म अधिक पैदावार देने वाली किस्मों से एक है और लगभग 14 से 16 टन प्रति एकड़ पैदावार मिलती है।

3. पूसा हरित – दूसरे इलाकों के साथ साथ, ये किस्म पहाड़ी इलाकों में भी पूरे साल उगाई जा सकती है। इसके पत्ते गहरे हरे रंग और बड़े आकार के होते हैं। इसमें बीज बनाने वाले डंठल देर से निकलते हैं, इसलिए बुवाई के बाद कई बार अन्तराल में कटाई कर सकते हैं।
4.पूसा ज्योति– यह पालक की एक महत्वपूर्ण और सबसे ज़्यादा चलने वाली किस्म है। इसके पत्ते बेहद मुलायम और बिना रेशे वाले होते हैं। इस किस्म को अगेती और पछेती, जब चाहें, उगाया जा सकता है। बुवाई के करीब 45 दिन के बाद इसकी फ़सल तैयार होती है और लगभग 7 से 10 बार कटाई की जा सकती है। अधिक पैदावार वाली इस किस्म से लगभग 18 से 20 टन प्रति एकड़ उपज मिलती है।
5. जोबनेर ग्रीन – इस किस्म के सभी पत्ते एक समान हरे रंग के, मुलायम, बड़े और मोटे आकार के होते हैं। ये पत्ते पकने के बाद आसानी से गल जाते हैं। इसे क्षारीय भूमि (alkaline soil) में भी उगाया जा सकता है। बुवाई से करीब 40 दिन में फसल तैयार हो जाती है। इस किस्म से लगभग 10 -12 टन प्रति एकड़ तक पैदावार मिलती है।
6. अर्का अनुपमा – इस किस्म को को हाइब्रिड तरीके से तैयार किया गया है। बुवाई से करीब 40 दिन में फ़सल तैयार होती है। इसकी 4 से 5 बार कटाई की जा सकती है। इस किस्म से 3 से 4 टन प्रति एकड़ पैदावार मिलती है।
ये भी पढ़ें : Top 5 Types of Mushrooms: मशरूम की इन 5 किस्मों की भारत में होती है सबसे ज़्यादा खेती, कम लागत और ज़्यादा मुनाफ़ा
पालक की कई किस्में अलग-अलग क्षेत्रों के मुताबिक भी उगाई जाती हैं।
7. हिसार सिलेक्शन 23 – ये किस्म हरियाणा और उसके आसपास के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। इस किस्म के पत्ते हरे रंग और बड़े आकार के होते हैं।ये जल्दी तैयार होने वाली किस्मों में शामिल है। बुवाई के करीब 30 दिन में फ़सल तैयार होती है और 15 दिन के अंतर पर, 6 से 8 बार कटाई की जा सकती है।
8. पंजाब सिलेक्शन – इस किस्म की खेती पंजाब और इसके आसपास के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। इसके पौध के तने हल्के जामुनी रंग के नजर आते हैं। इसके पत्ते हरे रंग के, पतले और लंबे होते हैं। इसका स्वाद हल्का खट्टा होता है।
9. लॉग स्टैंडिंग – इस किस्म के पत्ते गहरे हरे रंग के, मोटे और लंबे आकार के होते हैं। ये किस्म उत्तर प्रदेश, बिहार एवं उत्तर पूर्वी पर्वतीय क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है।
10. बनर्जी जाइंट – ये किस्म ज़्यादातर बंगाल में उगाई जाती है। इसके पत्ते काफी बड़े, मोटे तथा मुलायम होते हैं | इसके अलावा इसका तना और जड़ें भी काफी मुलायम होती हैं।
ये भी पढ़ें : करण वंदना- गेहूं की नई किस्म, जिससे किसानों को होगी बंपर कमाई, पढ़िए कहां की महिला किसानों ने कायम की मिसाल
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।
ये भी पढ़ें:
- तने की मजबूती: पौधे खुद को सीधा कैसे रखते हैं ? लिग्निन, पोटाश, नाइट्रोजन का समय और फसल गिरने का असली विज्ञानफसल का तना कोई साधारण डंडी नहीं है। यह एक जीवित ढांचा है जो पौधे को सीधा खड़ा रखता है और पानी व भोजन का परिवहन करता है। तना पत्तियों, फूलों और दानों को ऊपर संभालता है।
- पंजाब सरकार का बड़ा फैसला: 50 साल बाद मिलेगा ‘कच्चे’ किसानों को हक, बाढ़ पीड़ितों के खाते में आएगा पैसापंजाब सरकार (Punjab Government) ने किसानों और गरीबों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान (Chief Minister Bhagwant Mann) के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक में ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। इन फैसलों से जहां सैकड़ों ऐसे किसानों को राहत मिलेगी, जिनकी फसलें बाढ़ में (Punjab farmers will get compensation for crop loss ) बर्बाद… Read more: पंजाब सरकार का बड़ा फैसला: 50 साल बाद मिलेगा ‘कच्चे’ किसानों को हक, बाढ़ पीड़ितों के खाते में आएगा पैसा
- तेलंगाना में रिकॉर्ड स्तर पर कपास की खरीद, 12,823 करोड़ रुपये किसानों के खाते मेंतेलंगाना में 12,823 करोड़ रुपये की कपास की खरीद, 27 फरवरी तक खुला बाजार, किसानों को उपज बेचने में बड़ी सहूलियत।
- Holi And Indian Farming : केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत का जश्न है होलीहोली का त्योहार (Holi festival) सिर्फ रंगों का ही नहीं, बल्कि खुशियों और मेहनत के रंगों का भी (Holi and Indian farming) त्योहार है। और इस खुशी में सबसे आगे होते हैं हमारे अन्नदाता किसान भाई।
- मिलावट के खिलाफ जंग: FSSAI के ‘Food Safety on Wheels’ से हर गांव-गली में होगी डेयरी प्रोडक्ट्स की जांचFSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) पहल है ‘Food Safety on Wheels’ । ये कोई आम सरकारी गाड़ी नहीं, बल्कि चलती-फिरती हाईटेक लैब है, जो 24 घंटे आपके आसपास के इलाकों में घूमकर लोगों को शुद्ध दूध-घी का अधिकार दिला रही है।
- नई दिल्ली में आयोजित होगा पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026, किसानों को मिलेंगे नई तकनीक और समाधानपूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 में किसानों को नई तकनीक, उन्नत बीज और वैज्ञानिक समाधान की जानकारी मिलेगी, जिससे खेती बनेगी अधिक लाभकारी।
- नैनो फर्टिलाइज़र क्यों है नई ज़माने की खेती की ज़रूरत, जानिए IFFCO के मार्केटिंग डायरेक्टर डॉ. योगेंद्र कुमार सेखेती में यूरिया, डीएपी और नैनो यूरिया/डीएपी की बहुत अहम भूमिका होती है और भारतीय किसानों को इसकी आपूर्ति करता है भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (IFFCO), जो दुनिया की सबसे बड़ी उर्वरक सहकारी संस्थाओं में से एक है। किसान ऑफ़ इंडिया से खास बातचीत में IFFCO के मार्केटिंग डायरेक्टर डॉ. योगेंद्र कुमार ने कृषि… Read more: नैनो फर्टिलाइज़र क्यों है नई ज़माने की खेती की ज़रूरत, जानिए IFFCO के मार्केटिंग डायरेक्टर डॉ. योगेंद्र कुमार से
- Godhan Samagam-2026 : उत्तर प्रदेश में गौ-संरक्षण और किसानों के सम्मान का भव्य आयोजनपशुपालन और दुग्ध विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘गोधन समागम-2026’ (‘Godhan Samagam-2026’) महज एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि योगी सरकार की उस महत्वाकांक्षी सोच का आईना है।
- महाराष्ट्र ने बनाई देश में पहली बार किसानों के लिए ख़ास ‘Agriculture AI’नीति, खर्च होंगे 500 करोड़मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में राज्य ने ‘Agriculture AI’ के क्षेत्र में देश में पहल करते हुए एक ऐतिहासिक सम्मेलन आयोजित किया है, जिसका सीधा फायदा सबसे छोटे किसान तक को होगा।
- US Tariff: अमेरिका ने फिर बढ़ाया टैरिफ,10 से बढ़ाकर 15 फीसदी किया, भारत के किसान और कृषि पर क्या होगा असर ?अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (US Supreme Court) ने हाल ही में Trump के पुराने व्यापक टैरिफ को 6-3 के बहुमत से गैरकानूनी ठहरा दिया था। अदालत ने कहा था कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों का अतिक्रमण (Encroachment) किया है।
- बदलते मौसम में अब नहीं होगा नुकसान, अब AI तय करेगा कब बोएं, कब सींचें और कहां बेचें फसल!अब AI खेत-खलिहान में उतरकर किसानों की तकदीर बदलने वाला है। केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी (Union Agriculture Secretary Devesh Chaturvedi) ने हाल ही में ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ (India AI Impact Summit) में इस क्रांतिकारी बदलाव का खुलासा किया।
- भारत-ब्राजील कृषि सहयोग पर चर्चा के जरिए दोनों देशों ने मज़बूत की साझेदारीभारत-ब्राजील कृषि सहयोग पर चर्चा में दोनों देशों ने तकनीक, शोध और टिकाऊ खेती में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई।
- प्राकृतिक खेती ने बढ़ाया गोवर्धन क्लांटा का आत्मविश्वास और मज़बूत की सेब की खेतीप्राकृतिक खेती अपनाकर गोवर्धन क्लांटा ने सेब की खेती में घटाई लागत, बढ़ाई आय और मिट्टी की सेहत को किया मज़बूत।
- बिहार की ‘Sugarcane Mechanization Scheme’ बनी किसानों के लिए वरदान, सरकार दे रही है 60 फीसदी तक सब्सिडीबिहार के गन्ना उद्योग विभाग (Sugarcane Industry Department) की महत्वाकांक्षी ‘गन्ना यंत्रीकरण योजना’ (‘Sugarcane Mechanization Scheme) के तहत राज्य के 324 किसानों को मशीन ख़रीदने की परमिट जारी की गई है, जिसमें से 300 से ज़्यादा किसान मशीनें खरीद भी चुके हैं।
- 20 साल पहले शुरू की जैविक खेती, आलू के बीजों में माहिर किसान सुखजीत सिंहसुखजीत सिंह ने 20 साल पहले शुरू की जैविक खेती, आज भरोसेमंद आलू बीज उत्पादन से किसानों को दे रहे बेहतर विकल्प।
- यूपी की योगी सरकार का किसानों को तोहफ़ा: 70 करोड़ से बदलेगी कृषि की तस्वीर, हर गांव पहुंचेगी टेक्नोलॉजीयोगी सरकार ने केवल घोषणाएं ही नहीं की, बल्कि 70 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि (Amount of more than Rs 70 crore) सीधे तौर पर उन योजनाओं के लिए आवंटित की है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ यानी कृषि को मज़बूती देंगी।
- नौकरी छोड़कर शुरू की सब्जियों की नर्सरी, अमृतसर से पंजाब के किसानों तक पहुंचा रहे पौधेसब्जियों की नर्सरी से किसान मज़बूत शुरुआत कर रहे हैं, अमृतसर के भूपिंदर सिंह गिल की सफल पहल से बढ़ रही है मांग और मुनाफ़ा।
- शिवराज सिंह चौहान का स्पष्ट संदेश कृषि और किसानों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकताशिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसी भी व्यापार समझौते में किसानों के हितों से समझौता नहीं होगा, खाद्यान्न और डेयरी क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं।
- Madhya Pradesh Budget 2026: किसानों की झोली भरी, ‘किसान कल्याण वर्ष’ घोषित, जानें हर बड़ी बातमध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Government of Madhya Pradesh) ने आज 18 फरवरी 2026 को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026 का बजट (Madhya Pradesh Budget 2026) पेश कर दिया।
- Journal Nature Climate Change का ख़ुलासा: खेती से भी बढ़ रहा प्रदूषण, भारत भी इस लिस्ट में शामिलप्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल (Journal) Nature Climate Change में प्रकाशित एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट (New international report) ने खेती को लेकर ग्लोबल टेंशन बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में खेतों से निकलने वाली हार्मफुल गैसों के लिए सिर्फ छह देश जिम्मेदार हैं, और इनमें भारत का नाम भी शामिल है।
- अंगूर
- अदरक
- अन्य
- अन्य
- अन्य खेती
- अन्य सब्जी
- अमरूद
- आम
- आलू
- इनोवेशन
- इवेंट
- उर्वरक
- एक्सपर्ट किसान
- एक्सपर्ट ब्लॉग
- एग्री बिजनेस
- औषधि
- करेला
- किसान क्रेडिट कार्ड
- किसान सम्मान निधि
- कृषि उपकरण
- कृषि उपकरण न्यूज़
- कृषि उपज
- कृषि और खेती
- कृषि और बागवानी
- कृषि रोजगार एवं शिक्षा
- कृषि विश्वविद्यालय
- कृषि वैज्ञानिक
- कृषि संस्थान
- कृषि-विश्वविद्यालय
- कृषि-संस्थान
- केला
- खजूर
- गन्ना
- गेहूं
- जल कृषि
- जलवायु परिवर्तन
- ज़ीरो बजट खेती
- जैविक खेती
- जैविक/प्राकृतिक खेती
- टमाटर
- टेक्नोलॉजी
- ट्रेनिंग
- ट्रैक्टर
- डेयरी फ़ार्मिंग
- ड्रोन
- तकनीकी न्यूज़
- थ्रेशर
- दाल
- देसी गाय
- धान
- नारियल
- नौकरी
- न्यूज़
- पपीता
- पशुपालन
- पशुपालन और मछली पालन
- पशुपालन तकनीक
- पशुपालन न्यूज़
- पालक
- पॉवर टिलर
- पोटैटो डिगर
- प्याज
- प्राकृतिक खेती
- प्रॉडक्ट लॉन्च
- फल-फूल और सब्जी
- फलों की खेती
- फसल न्यूज़
- फसल प्रबंधन
- फसल बीमा
- फसल बीमा योजना
- फ़ूड प्रोसेसिंग
- फूलों की खेती
- बकरी पालन
- बिज़नेस न्यूज़
- बीज उत्पादन
- बैंगन
- भांग
- भिंडी
- भूमि अधिग्रहण
- मक्का
- मछली पालन
- मछली पालन तकनीक
- मंडी भाव
- मशरूम
- मसालों की खेती
- महुआ
- मिट्टी की सेहत
- मुर्गी पालन
- मूंगफली
- मोबाइल ऐप्स
- मौसम
- राइस प्लांटर
- राज्य
- रीपर
- रोटावेटर
- लहसुन
- लाईफस्टाइल
- लिलियम
- लोन
- वर्मीकम्पोस्ट
- विविध
- वीडियो
- सक्सेस स्टोरीज
- सफल पुरुष किसान
- सफल महिला किसान
- सब्जियों की खेती
- सब्जी/फल-फूल/औषधि
- सरकारी योजनाएं
- सरसों
- सूअर पालन
- सेब
- स्टार्टअप
- स्ट्रॉबेरी
- स्प्रेयर
- स्वास्थ्य
- हल्दी
- हेल्थ फ़ूड
- होम गार्डनिंग





















